यहाँ "लोन सर्वाइवर" (अकेला बचा हुआ) की भावना पर आधारित एक मौलिक हिंदी कहानी प्रस्तुत है: साल 2045 था। उत्तर भारत के घने जंगलों में एक भयानक गृह युद्ध छिड़ा हुआ था। दो ताकतवर गुटों के बीच संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया था।
एक-एक करके विक्रादित्य ने अपने साथियों को गिरते देखा। पहले रमन, फिर प्रीत, फिर करन... हर बार एक धमाका, एक गोली, एक चीख। रात के अंधेरे में वह अपने मृत साथियों के बीच घंटों छिपा रहा। lone survivor in hindi
अकेलेपन ने उसे डरा दिया। उसे लगा, "मैं कैसे जीवित रहूँगा? यहाँ से निकलूँगा कैसे?" "मैं अकेला था
विक्रादित्य गिर गया। लेकिन इससे पहले कि दुश्मन उसे खत्म करता, हेलीकॉप्टरों की आवाज़ आई - उसकी सेना आ गई थी। उन्होंने विक्रादित्य को बेहोशी की हालत में बचाया। तो अकेलापन कमजोरी नहीं
तो विक्रादित्य ने कहा, "मैं अकेला था, लेकिन हारा नहीं था। मेरे साथ मेरे मृत साथियों की यादें थीं, और उन्हें न्याय दिलाने का संकल्प था। जब आपके पास लड़ने का कारण हो, तो अकेलापन कमजोरी नहीं, ताकत बन जाता है।" जीवन में सबसे बड़ी लड़ाई कभी दुश्मन से नहीं, बल्कि अपने मन के डर और अकेलेपन से होती है। जिसमें वह जज़्बा होता है, वह अकेले ही पूरी सेना बन जाता है।